जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राज्य के लाखों पेंशनर्स को बड़ी राहत देते हुए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाण पत्र) जमा करने की प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बना दिया है। सरकार ने वित्त (पेंशन) विभाग को आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication) के उपयोग की अनुमति प्रदान कर दी है, जिससे पेंशनरों की पहचान का सत्यापन अब तेज और सुगम तरीके से किया जा सकेगा।
इस निर्णय के बाद पेंशनर्स को पहचान सत्यापन के लिए बार-बार विभिन्न दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता कम होगी। साथ ही पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और समय की भी बचत होगी। यह कदम विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स के लिए लाभकारी माना जा रहा है, जिन्हें हर वर्ष जीवन प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होता है।
राज्य सरकार ने यह अनुमति भारत सरकार की सहमति प्राप्त होने के बाद जारी की है। इसके तहत वित्त (पेंशन) विभाग आधार संख्या धारकों की पहचान सत्यापित करने के लिए आधार प्रमाणीकरण का उपयोग कर सकेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि आधार आधारित प्रमाणीकरण पूरी तरह स्वैच्छिक (वॉलंटरी) रहेगा।
सरकार ने साफ किया है कि किसी भी पेंशनर को आधार के माध्यम से प्रमाणीकरण कराने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि कोई पेंशनर आधार प्रमाणीकरण का उपयोग नहीं करना चाहता या तकनीकी अथवा अन्य कारणों से इसका उपयोग करने में असमर्थ है, तो उसे किसी भी प्रकार की पेंशन सेवा या सुविधा से वंचित नहीं किया जाएगा।
पेंशनर्स के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के अन्य विकल्प भी पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे। वे अपनी एसएसओ आईडी (SSO ID) के माध्यम से ऑनलाइन जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अलावा कोषालय (ट्रेजरी) या पेंशन विभाग में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर भी जीवन प्रमाण पत्र जमा किया जा सकता है। वहीं राज्यभर के ई-मित्र केंद्रों पर भी डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा कराने की सुविधा जारी रहेगी।
सरकार का मानना है कि आधार प्रमाणीकरण की सुविधा शुरू होने से पेंशनर्स को अधिक सहज, सुरक्षित और तेज सेवाएं मिलेंगी तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह पहल राज्य के लाखों पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है।
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