विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि उन्होंने अपने जीवन में हमेशा अपने इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज के आधार पर फैसले लिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं के बयानों से उनके कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और वह स्वयं भी इससे दुखी हैं।
उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया, वहां यदि उनकी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का यह परिणाम है तो इससे वह अंदर से आहत हुए हैं। सिंह ने अपने पोस्ट में मान-सम्मान और स्वाभिमान को अपने लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस में कथित चापलूसी की परंपरा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गलत को गलत कहना और सच के साथ खड़ा रहना उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वह गलत काम नहीं करते और गलत को सहन भी नहीं करते।
सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन को जनता और कार्यकर्ताओं के प्रति समर्पित बताते हुए कहा कि उनके लिए क्षेत्र और प्रदेश के लोगों की सेवा सबसे महत्वपूर्ण रही है।
विश्वेंद्र सिंह पिछले कुछ दिनों से राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा रहे थे। उन्होंने भरतपुर में नगर निकाय चुनाव के दौरान टिकट वितरण में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए डोटासरा के इस्तीफे की मांग भी की थी।
उन्होंने डोटासरा और उनके परिवार से जुड़े पुराने भर्ती मामलों की जांच की मांग भी उठाई थी। ये आरोप विश्वेंद्र सिंह की ओर से लगाए गए हैं; संबंधित पक्षों के जवाब और जांच के निष्कर्ष अलग विषय हैं।
विश्वेंद्र सिंह राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह पहले भाजपा में भी रह चुके हैं और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्हें राजनीतिक सलाहकार का पद दिया गया था और मंत्री स्तर का दर्जा भी मिला था।
कांग्रेस से इस्तीफे के बाद अब उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने फिलहाल अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
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