जयपुर। राजस्थान में मानसून की रफ्तार को लेकर लोगों की नजरें मौसम पर टिकी हैं। इसी बीच जयपुर के विश्व प्रसिद्ध जंतर-मंतर में सदियों पुरानी परंपरा के तहत आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर 'वायु परीक्षण' किया गया। इस विशेष परंपरा में सम्राट यंत्र पर ध्वज फहराकर हवा की दिशा और गति का अध्ययन किया जाता है, जिसके आधार पर आने वाले मानसून का अनुमान लगाया जाता है।
परीक्षण के दौरान ज्योतिषाचार्यों ने पाया कि अधिकांश समय हवा पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहती रही। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यह दिशा अच्छी और संतुलित वर्षा का संकेत मानी जाती है। हालांकि कुछ समय के लिए हवा ईशान (उत्तर-पूर्व) से नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) दिशा की ओर भी चली, लेकिन प्रमुख प्रवाह पूर्व से पश्चिम ही रहा। इसी आधार पर विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि सावन और भाद्रपद (भादो) के महीनों में अच्छी बारिश होने की संभावना है।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह परंपरा दशकों से निभाई जा रही है और जंतर-मंतर का सम्राट यंत्र वायु प्रवाह का सटीक अध्ययन करने में सहायक माना जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रह-नक्षत्रों और स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों के कारण पूरे राजस्थान में वर्षा का स्वरूप एक जैसा नहीं रहेगा। कहीं भारी बारिश हो सकती है तो कहीं सामान्य या कम वर्षा भी देखने को मिल सकती है।
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