राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने बारां जिले में ट्रैफिक इंचार्ज (यातायात प्रभारी) सब-इंस्पेक्टर चंद्रप्रकाश को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी स्थानीय क्षेत्र में चलने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के मालिकों से बिना किसी रुकावट के वाहनों को चलाने देने के एवज में अवैध रूप से 'मासिक बंदी' वसूल रहा था।
ACB को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बारां शहर और आसपास के मार्गों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के चालकों से एंट्री और मासिक बंदी के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही थी। शिकायतों का सत्यापन करने के बाद ACB ने आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया। इस कार्रवाई का नेतृत्व ACB के ASP कालूराम वर्मा और DIG ओमप्रकाश मीणा ने किया।
जैसे ही शिकायतकर्ता घूस की राशि लेकर ट्रैफिक प्रभारी के पास पहुंचा और आरोपी ने पैसे अपने हाथ में लिए, वैसे ही ACB की टीम ने उसे दबोच लिया। इस कार्रवाई में आरोपी के आधिकारिक दफ्तर और सरकारी दस्तावेज तुरंत सीज कर दिए गए। आरोपी के आवासीय ठिकानों और पैतृक घर की तलाशी भी ली जा रही है।
बारां और हाड़ौती अंचल में कृषि और स्थानीय व्यापार से जुड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या अधिक होने के कारण 'मासिक बंदी' भ्रष्टाचार का एक संगठित रूप बन चुकी थी। आरोपी ने वाहन मालिकों से मासिक राशि वसूली और भुगतान न करने वालों के वाहनों के चालान काटने या थानों में खड़ा करने जैसी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना की।
ACB ने आरोपी के हाथों पर विशेष रासायनिक घोल (सोडियम कार्बोनेट सॉल्यूशन) डालकर घूस लेने का वैज्ञानिक प्रमाण सुनिश्चित किया। इस कार्रवाई के माध्यम से ट्रैफिक प्रभारी चंद्रप्रकाश कानून के शिकंजे में आ गया और जांच यह पता लगाने के लिए जारी है कि क्या अन्य पुलिस अधिकारी भी इस अवैध नेटवर्क में शामिल थे।
यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की दक्षता और गुप्त सूचना प्रणाली का उदाहरण है, जिसने बारां जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक बड़ी कड़ी को तोड़ दिया।
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